आयुर्वेद के अनुसार शरीर को रखें फिट, जानें EXERCISE और DIET
ऑयुर्वेद इलाज के लिए शरीर के तीन तत्वों पित्त, कफ और वात को आधार बनाता है। इनके आधार पर शरीर को बांटा जाता है। इन्हीं के हिसाब से व्यक्ति का स्वभाव और सेहत का निर्धारण होता है। हम आपको इससे जुड़ी जानकारी दे रहे हैं।
1-पित्त
आयुर्वेद के अनुसार पित्त युक्त शरीर का स्वामी अग्नि है।
कैसा होता है शरीर : इस तरह के लोग मध्यम कद-काठी के होते हैं। इनमें मांसपेशियां अधिक होती हैं और इन्हें गर्मी अधिक लगती है। अक्सर ऐसे लोग गंजेपन का शिकार हो जाते हैं। इनकी त्वचा कोमल होती है और इनमें ऊर्जा का स्तर अधिक रहता है। ऐसे लोगों को पसीना आने की समस्या ज्यादा होती है।
व्यवहार: इस तरह के लोग आसानी से किसी काम से विचलित नहीं होते। इन्हें नींद बहुत अच्छी आती है। इसके साथ ही इन्हें भूख तेज लगती है। आमतौर पर इनकी आवाज बुलंद होती है।
मानसिक स्थिति: ऐसे लोगों में आत्मविश्वास बहुत अधिक होता है। ये महत्वाकांक्षी होते हैं। इन्हें परफेक्शन की आदत होती है। ऐसे लोगों में रचनात्मक कार्य करने की विशेष क्षमता होती है।
वात युक्त शरीर का स्वामी वायु है।
कैसा होता है शरीर : इस तरह के लोगों का वजन तेजी से नहीं बढ़ता और अधिकतर ये छरहरी काया के होत हैं। इनका मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है, लेकिन इन्हें सर्दी लगने की आशंका अधिक रहती है। आमतौर पर इनकी त्वचा रूखी होती है और नब्ज सामान्य से तेज चलती है।
व्यवहार:ऐसे लोग बहुत ऊर्जावान और फिट होते हैं। इनकी नींद कच्ची होती है, इसलिए अक्सर इन्हें अनिद्रा की शिकायत रहती है। इनमें कामेच्छा अधिक होती है। इस तरह के लोग बातूनी किस्म के होते हैं।
मानसिक स्थिति: ऐसे लोगों में बहुत प्रतिभा होती है। ये भावनाओं का इजहार जल्दी करते हैं। इनकी याद्दाश्त थोड़ी कमजोर होती है और आत्मविश्वास कम रहता है। ये जल्दी तनाव में आते हैं।
कफ युक्त शरीर के स्वामी जल और पृथ्वी होते हैं।
कैसा होता है शरीर : इस तरह के लोग सामान्य से मोटे होते हैं। ऐसे लोगों के कंधे और कमर का हिस्सा सामान्य व्यक्तियों से अधिक चौड़ा होता है। इनका वजन तेजी से बढ़ता है। इनमें स्टैमिना भी अधिक होता है। साथ ही, शरीर मजबूत होता है।
कैसा होता है शरीर : इस तरह के लोग सामान्य से मोटे होते हैं। ऐसे लोगों के कंधे और कमर का हिस्सा सामान्य व्यक्तियों से अधिक चौड़ा होता है। इनका वजन तेजी से बढ़ता है। इनमें स्टैमिना भी अधिक होता है। साथ ही, शरीर मजबूत होता है।
व्यवहार: ऐसे लोग खाने के बहुत शौकीन होते हैं। इस कारण इनमें आलस की अधिकता होती है। इन्हें सोना बहुत पसंद होता है। इनमें सहने की क्षमता अधिक होती है और ये समूह में रहना अधिक पसंद करते हैं। इनके स्वभाव में गंभीरता का गुण होता है।
मानसिक स्थिति: इन्हें सीखने में समय लगता है और ये भावनात्मक होते हैं। इन्हें सामान्यत: गुस्सा बहुत कम आता है। ये शांति पसंद होते हैं। ये छोटी-छोटी बातों को भी दिल से लगाकर बैठ जाते हैं।
कफ प्रधान लोगों के लिए
कफ युक्त शरीर के लोगों को हेवी भोजन से परहेज करना चाहिए। काली मिर्च, अदरक और हरी मिर्च का सेवन इनके लिए फायदेमंद हो सकता है।
वात लोगों के लिए
कफ युक्त शरीर के लोगों को हेवी भोजन से परहेज करना चाहिए। काली मिर्च, अदरक और हरी मिर्च का सेवन इनके लिए फायदेमंद हो सकता है।
वात लोगों के लिए
वात युक्त शरीर वाले लोगों को डाइट में अधिक से अधिक फल, बीन्स, डेयरी उत्पाद, नट्स का सेवन करना चाहिए।
पित्त प्रधान लोगों के लिए
पित युक्त शरीर के लिए डाइट में सब्जियां, फल, आम, खीरा आदि ज़्यादा खाना चाहिए।
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